苏米娅·丝绒光
The Ethereal Beauty of Lingerie Photography: A Study in Grey and Light
ग्रे लेस का मैजिक
अरे भई! इतना सुंदर कैमरा क्यों चलाती हो? बस बिना पानी के ही पानी में स्विम करती हुई!
स्टाइल में रहस्य
ये ‘ग्रे’ लेस… हैवी है! पर कोई ‘फ्रेश’ महसूस होता है। कलम से पटकने की बजाय… सिर्फ़ ‘छुप-छुप’ में पकड़ती है!
51 फ्रेम = 300% मेहनत
इतना सबकुछ… 30 मिनट में? हाँ! क्योंकि प्रोफ़ोटो B10s के साथ ‘लाइट’ का सच्चा मंत्र: ‘घुल-मिल-घुल’!
#वनमनशब्द - “अब तक”
जब महिला साँस छोड़ती है… वहीं ‘फ़्रेम’ में ‘दर्शन’ हो जाता है। आखिरकार… आपको किसे दिखना है? 😏
The Quiet Power of Presence: A Visual Poem on Sisterhood and Stillness in Motion
जब मैंने पहली बार इस कैमरे को देखा… सोचा ‘ये सेक्सी है?’
पर मेरी माँ के कानड़िक संगीत के साथ…
उसने कहा — “बच्चा, ये पिल्ली है!”
अब मुझे समझ में आया —
सुंदरता कभी फिल्म में नहीं,
वो पिल्ली कि धुन-धुन है।
कल्पट्रॉन पर जाकर…
क्या आपको ‘शांत’ से ‘सेक्स’ होता है? 😏
कमेंट्री में बताओ —
किसने पहली फिल्म कब्ज़ा? 👀
The Art of Subtlety: Why Yellow Isn’t Just a Color—It’s a Mood (And a Statement)
पीलो का रंग? ये तो सिर्फ मूड है! 🌅
जब मैंने पहली बार कैमरा क्लिक किया — पीला ड्रेस पहने वाली महिला ने मुझसे पूछा, “तुम्हारी स्किन क्यों है?”
मेरी माँ कहती हैं — “ये सफेद है, सुनफ्लावर नहीं!”
और मेरे पापा…उन्हें तो समझ में ही आया कि ‘कमल’ (कमल = कमल)।
अब हर पोस्ट पर ‘yellow’ सिर्फ RGB value नहीं — वो toh ek mood hai jismein koi binaa na chahi, jo khaliya nahi… jo dard hai.
तुम्हारा photo kaise lag raha hai? कमेंट्र में #जवाब_द_द_द_द_द_द_द_द_द_द
The Quiet Elegance of Shadow and Silk: A Photographic Meditation on Asian Femininity
ये फोटोग्राफी में कोई ‘सेक्सी’ नहीं है… सिर्फ़ सांस है।
मेरी माँ कहती हैं — ‘बच्चा पड़ेगे तो कलम पर!’
कल्लम का अंधक सिल्क? हाँ!
जब मैंने पहली बार ‘शैडो’ को प्रेस किया…
तभी समझा — मुझे दिखना है।
आपके पास क्या है?
(कमेंट्र में बताओ… मुझे तुम्हारा सुनना है।)
Perkenalan pribadi
दिल्ली की रातों में छिपे रंगों को कैमरे में समेटने वाली सौम्या। हर फ्रेम में एक कहानी, हर स्माइल में एक प्रतिज्ञा। जब तुम्हें 'परफेक्ट' होने की प्रेरणा मिलती है, मैं तुम्हें 'अनसुना' होने का साहस दूँगी।




