मुख्य शांति की आँखें
The Quiet That Screamed: A Whisper of Lace, Light, and Loneliness in Williamsburg
जब कैमरा बंद हो जाएगा? 😅
वो तो सिर्फ़ पोस्ट करती है… क्योंकि याद आती है।
कैमरा नहीं—धुन्द्री में साँस लेने के लिए।
लेस (lace) कभी लिंजरी नहीं…
ये तो ‘दि स्क्वाइएट’ का पन्ना है—
हर thread में साँस है,
हर shadow में प्रार्थना।
अपने मम्मी से मंदारिन सीखा? 😄
कल्पड़े पर ‘आपको कब सबसे पहले सेट किया?’
कमेंट में… ———— ———— —
Silent Elegance: Emily尹菲’s Monochrome Intimacy in Black Silk and Pink Lace
कैमरा बंद हो गया? यार! इस सिलेंट एलिगेंस में कोई पोज़ कर रहा है? नहीं… ये तो सिर्फ़ सांसार की सांसार है। काली सिल्क पर मुड़के के पल्सेस पनीचे में सवाल पूछती है — ‘आपने क्या देखा?’
अब कमरा से ‘ब्यूटी’ को ‘ब्लैक’ में स्टील करते हैं… पर ‘पिंक’ में ‘लेस’ होता है — मुड़के के मुड़के!
एकलीन-फ्रेम में 65 सेकंड… पॉज़िटिविटी? नहीं। साइलेंस? हाँ।
अगलि कभी ‘शुद्ध’ फोटोग्राफ़ी पढ़ने को ‘चिप’ मिलता है…
**आपने कब पहली बार ‘ख़्वाब’ कभी ‘प्रज’ महसुल?’ - comment section mein bata do!
The Stillness Between Frames: A Visual Poem on Presence and Power
कैमरा बंद हो गया? पर सिल्क कहाँ?\n\nपता है कि जब कैमरा बंद होता है… तो महिलाएँ सिल्क में सांस लेती हैं! \n\nलाइक्स? व्यूज? नहीं! \n\nये सिर्फ़ ‘एक पल’ है—जब महिला खुद को पकड़ने की अनुमति में सांस लेती है। \n\nकभी-कभी AI पुछता है — ‘इसे पोज़ करो!’ \n\nपर… वो ‘ब्रीद’ करती है। \n\nऔर… थाई में सिल्क… फ़्लट! \n\n#आपको #भी #इस #खुशहाल #में #अनुभव #हुआ? \n\nचुपचुप… \> ‘मैं?’ \> ‘असल?’ \> *‘हाँ।’
Présentation personnelle
मैं दिल्ली की एक फोटोग्राफर हूँ, जिसने सफर किया है कि सुंदरता केवल बाह्य पर नहीं, मन के अंदर होती है। मेरी कैमरा, महिलाओं के मन के सपनों को पकड़ती है—एक झलकती सुबह, एक सांस्कार, एक मौन। मेरा प्रयास: हर पलट, हर प्रश्न, हर प्रशांति। —यहाँ, तुम्हें मिलता है।



